तेरी चूत ने लंड पर निशान कर दिया

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मेरा नाम रोशनी है और मैं वाराणसी की रहने वाली हूं। मेरा कॉलेज टाइम से एक बॉयफ्रेंड था उसका नाम समीर था। मैं और समीर एक दूसरे को बहुत पसंद करते थे। जब हमारा कॉलेज पूरा हो गया उसके बाद समीर ने मुझे शादी के लिए प्रपोज किया। मैं उससे शादी करने के लिए तैयार थी लेकिन पता नहीं यह बात हमारे घरवाले मानते कि नहीं। मैंने समीर से कहा कि पहले तुम सेटल हो जाओ उसके बाद मैं अपने घर वालो से तुम्हारे बारे में बात करूंगी। फिर हमने कुछ समय बाद अपने घर पर बात की। समीर के मां पापा तो शादी के लिए राजी हो गए थे। लेकिन मेरे मम्मी पापा इस शादी के लिए राजी नहीं हुए। मैंने उन्हें बहुत समझाया कि वह एक अच्छी जॉब मे है और उसके घर वाले भी बहुत अच्छे हैं। वह मुझे हमेशा खुश रखेगा लेकिन वह तब भी शादी के लिए नहीं माने। फिर एक दिन मैंने अपने मम्मी पापा के खिलाफ जाकर समीर से शादी कर ली।

शादी करने के बाद जब मैं अपनी मम्मी पापा से मिलने आई तो मेरे पापा ने मुझे घर के अंदर नहीं आने दिया और मुझे डांटते हुए घर से निकाल दिया। फिर मैं और समीर मुंबई जाकर सेटल हो गए थे। अब हम दोनों वहीं रहने लगे थे। हमें वहां रहते रहते दो साल हो चुके थे। इन दो सालों के बीच मैं अपने लिए एक अच्छी सी जॉब तलाश कर रही थी। और फाइनली मुझे एक दिन जॉब मिल ही गई। इन दो सालों के दौरान मेरे और समीर के बीच में कभी भी लड़ाई झगड़े नहीं होते थे और हम दोनों एक दूसरे के साथ खुशी खुशी रहते थे। लेकिन जब से मेरी जॉब लगी समीर का बर्ताव बदलने लगा। पहले तो जब मैंने उसे अपने जॉब के बारे में बताया तो वह बहुत खुश हो गया लेकिन मेरे जॉब के कुछ दिन बाद वह मुझसे अजीब तरीके से बात करने लगा। ऑफिस में कभी-कभी ज्यादा काम होने के कारण मैं घर देर से लौटती थी और इसी बात पर समीर को गुस्सा आता था कि मैं अकेले रात को घर आ रही हूं। मैंने समीर को बहुत समझाया कि मैं छोटी बच्ची नहीं हूं। मैं खुद आ जा सकती हूं और तुम परेशान मत हुआ करो।

समीर ने एक दिन मुझसे कहा कि मैं ज्यादा देर तक ऑफिस में नहीं रहूंगी। समीर ने मुझे कई बार कहा पर कभी-कभी आने में देर हो ही जाती थी फिर समीर का गुस्सा और बढ़ जाता था।

कुछ दिनों तक तो समीर ने मुझसे बात तक नहीं की और जब एक दिन समीर का बर्थडे था तो मैंने उसके लिए एक सरप्राइज पार्टी करने की सोची। उस दिन मैंने ऑफिस से छुट्टी ले रखी थी और समीर भी मुझसे बात नहीं कर रहा था। उसके काम पर जाने के बाद मैंने शाम को पार्टी की तैयारी की मैंने सोचा जब तक समीर घर लौटेगा तब तक मैं सारी तैयारी कर चुकी होंगी। मैंने अपने और उसके सारे दोस्तों को इनवाइट किया उस पार्टी में मेरे ऑफिस के कुछ लोग भी आ रखे थे। जैसे ही समीर ऑफिस से घर लौटा तो उसने देखा कि मैंने उसके लिए सरप्राइज पार्टी रखी है। वह बहुत खुश हुआ और मैंने उसे जल्दी से फ्रेश होकर पार्टी ज्वाइन करने के लिए कहा। फिर वह जल्दी से जाकर तैयार होकर पार्टी में आया। उसके बाद हम दोनों ने मिलकर केक काटा और एक दूसरे को केक खिलाया। उस समय समीर का मूड अच्छा था और मुझे इस बात की खुशी थी। जब हम लोग पार्टी इंजॉय करने लगे तो मैं अपने ऑफिस के कुछ दोस्तों के साथ बातें करने लगी। समीर यह सब देख रहा था लेकिन मेरा ऐसा कोई गलत इरादा नहीं था जिससे कि समीर को बुरा लगे। लेकिन फिर भी वह मुझ पर शक करने लगा और अलग से जाकर बैठ गया। वहां पर ड्रिंक करने लगा मुझे क्या पता था कि समीर के दिमाग में क्या चल रहा है। अगर मुझे यह सब पता होता तो मैं उन्हें इस पार्टी में कभी नहीं बुलाती। पार्टी खत्म होने के बाद मैं घर का काम निपटा रही थी। तब तक समीर आया और मुझ से ऊंची आवाज में बात करने लगा। मैंने समीर से कहा कि मैंने यह पार्टी इसीलिए रखी ताकि मैं अपने दोस्तों के साथ इंजॉय कर सकूं पर यह बिल्कुल गलत था। मैंने यह पार्टी सिर्फ समीर की खुशी के लिए रखी थी। मेरे जॉब से उसे दिक्कत होने लगी थी वह मुझे किसी से बात भी नहीं करने देता था। मैं इस बात से बहुत परेशान हो गई थी फिर मुझे लगा की कहीं मेरे शादी करने का फैसला गलत तो नहीं था। काश मैं अपने मां पापा का कहना मान लेती। उस समय मुझे अपने घरवालों की बहुत याद आ रही थी।

मैंने समीर से प्यार से बात की और उसे समझाने की कोशिश की तुम गलत समझ रहे हो जैसा भी तुम्हारे दिमाग में चल रहा है। वह सब गलत है तुम मुझे समझने का प्रयास करो। मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है जिससे मुझे कुछ ऐसा गलती का एहसास हो या तुम्हें  शर्मिंदा होना पड़े। अब वह थोड़ी बहुत मेरी बात को समझने लगा। मैंने उसे कहा कि आज बहुत दिन हो गए हम दोनों में अच्छे से सेक्स भी नहीं किया है। तुम ना जाने पता नहीं किस बात में गुस्सा होते रहते हो। उसने कहा ठीक है आज मैं तुम्हारी सेक्स की इच्छा पूरी कर देता हूं लेकिन उसके दिल और दिमाग में अभी भी गुस्सा बैठा हुआ था।

उसने मुझे वहीं लेटा दिया और मुझे स्मूच करने लगा और बहुत प्यार से मुझे किस कर रहा था। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह इस तरीके से मेरे साथ किस कर रहा था। वह मेरे होठों को अपने होठों से चूसता तो मुझे एक अलग ही एहसास होता। मुझे ऐसा लगता ना जाने कितने समय बाद मुझे अच्छे से किस कर रहा है। अब उसने मेरे कपड़े उतार दिए और अपने लंड को मेरे मुंह में लगाने लगा। मैं समझ चुकी थी कि इसको मुझे अपने मुंह में लेना है। मैंने उसके लंड  को अपने मुंह में ले लिया और उसे सेकिंग करने लगी। मुझे बहुत अच्छा लगता जब मैं उसके लंड को अच्छे से चूसती। उसे यह बात अच्छे से मालूम है कि मुझे उसके लंड को चूसने में बहुत मजा आता है। थोड़ी देर बाद उसने मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेना शुरू किया और वह मेरे चूचो को बड़े प्यार से चाटता। जिससे कि मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी और मेरा पानी भी गिरने लगा था। उसने झट से अपने लंड को मेरी चूत मे डाल दिया और मुझे ऐसे ही धक्के मारने लगा। काफी देर तक उसने मुझे ऐसे ही झटके मारे और उसका वीर्य गिर गया। लेकिन उसे तो मेरी गांड मारनी थी।

उसने अपनी जीभ से मेरी गांड को चाटना शुरु किया। मैं बहुत ही खुश हो रही थी कि यह दोबारा से मेरी चूत मारेगा लेकिन उसने सरसों का तेल अपने लंड पर लगा लिया। अब उसने मुझे घोड़ी बनाया तो उसने इतनी तेजी से मेरी गांड मे अंदर तक अपना लंड डाल दिया। मुझे ऐसा लगा कि पता नहीं मेरी गांड में कुछ फस गया हो। मैं बहुत ही तेज चिल्लाने लगी लेकिन उसने मुझे पकड़ कर रखा। उसने मेरी  गांड को इतनी तेजी से पकड़ रखा था कि मैं कहीं जा भी नहीं सकती थी और ना ही हिल पा रही थी। अब उसने अंदर बाहर करना शुरू किया जैसे ही उसने अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया। तब मेरी आवाज में अलग ही दर्द निकलने लगा लेकिन वह मेरी गांड मारता रहा।

उसने बहुत ही गंदे तरीके से मेरी गांड मारी। मुझे अहसास हो गया था कि अब यह मुझसे अपनी बात का बदला ले रहा है और मुझे ऐसे ही रगड़ रहा है। उसने मेरी गांड के गूदे को भी सूजा कर रख दिया उस से खून निकलने लगा। वह अब भी मुझे चोद रहा था लेकिन मुझे अब थोड़ा अच्छा लगने लगा था क्योंकि काफी देर हो चुकी थी। वह ऐसे ही अपने लंड को अंदर बाहर करे जा रहा था। उसने इतनी तेज पिचकारी मारी कि वह सीधा मेरी गांड के अंदर तक गई। उसने जैसे ही अपने लंड को मेरी गांड से बाहर निकाला तो उसका सारा वीर्य मेरी गांड से टपक रहा था। उसने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया उसका लंड मेरी गांड से टकरा रहा था और वह मुझसे कहने लगा कि अब मेरा गुस्सा ठंडा हो गया है। मैं यह सब समझ गई थी कि इसने आज जानबूझकर मेरी गांड मारी है लेकिन मैंने उसे कुछ नहीं कहा क्योंकि वह मेरा पति है। हमें रहना तो साथ में ही है उसके बाद से तो मेरी गांड को रोज मारने लगा। अब वह सिर्फ मेरी गांड ही मारता है और कुछ नहीं उसे बहुत अच्छा लगता है।