सौतेली माँ और मेरा खड़ा लंड

hindi porn kahani, desi sex stories

कुछ समय पहले की बात है। जब मैं स्कूल में पढ़ता था। यह तब की बात है। जब मैं अपने पिताजी के साथ काम पर जाया करता था। हम एक छोटे शहर के गरीब परिवार से है। लेकिन मैं अपने पिताजी जैसी जिंदगी नहीं जीना चाहता था। मुझे यह सब देख कर बहुत दुख होता था। मेरे पिताजी एक बड़े घर में नौकरी करते थे। वहां मेरे पिताजी अपने मालिक के आदेशों का पालन करते थे। उस घर में जो भी काम होता था वह मेरे पिताजी करते थे। जब मैं स्कूल से घर आता था तो अपने पिताजी के साथ काम पर जाया करता था। क्योंकि मेरे जाने से थोड़ा ज्यादा पैसे मिला करते थे। मैं उस समय 15 साल का था। जब भी मेरे पिताजी उस घर में काम पर जाते थे तो मैं भी उनके साथ थोड़ा बहुत काम कर लिया करता था।

मैं अभी छोटा था इसलिए मैं ज्यादा काम नहीं कर पाता था। लेकिन छोटे-मोटे काम कर लेता था। जब मेरे पिताजी  काम करते तो  उनके मालिक आराम से बैठ कर सबको  आदेश देते और उनको उनका काम बताते। उस घर का काम मेरे पिताजी और वहां के बाकी नौकर किया करते थे और तारीफें उनके मालिक की हुआ करती थी। मैं सोचता था कि जब काम यह लोग कर रहे हैं तो तारीफ भी इनकी ही होनी चाहिए। लेकिन लोग तो मालिक की ही तारीफ किये जा रहे है। उस दिन मैं घर गया और सारी रात यही सोचता रहा कि जो इतना काम कर रहा है। उसकी तो कोई तारीफ ही नहीं कर रहा और जो आराम से बैठकर आराम फरमा रहा है उसकी सब वाहवाही कर रहे हैं। मैंने भी सोच लिया कि मैं भी एक दिन ऐसे ही बड़ा आदमी बनूंगा और अपने पिताजी को यहां काम नहीं करने दूंगा। हमारे परिवार में मेरी मां और मेरे पिताजी हैं।

एक दिन हमारे स्कूल में नई टीचर आई थी। वह हमारी क्लास में आई और उन्होंने हम सब से हमारा परिचय पूछा। टीचर ने हम सब से पूछा कि तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो। सब बच्चों ने अपनी अपनी राय दी। थोड़ी देर बाद मेरी बारी आई। मुझसे भी मेरी टीचर ने पूछा कि अब तुम बताओ। जब तुम बड़े हो जाओगे तो तुम क्या बनोगे तुम्हारा क्या सपना है। टीचर कि इस बात से मुझे अपने पिताजी का उस घर में काम करना याद आ रहा था। वह कितनी मेहनत से वहां काम किया करते हैं और पसीना बहाकर घर में पैसे लाते हैं। मैंने टीचर से कहा एक दिन में बहुत बड़ा आदमी बनूंगा और मेरा भी अपना एक बहुत बड़ा घर होगा। जहां बहुत नौकर हुआ करेंगे और मेरे पिताजी आराम से बैठकर सबको अपना-अपना काम बताते रहेंगे और मेरी मां भी अच्छे-अच्छे कपड़े पहना करेगी। यह सुनकर टीचर मुझसे खुश हो गई। उसके थोड़ी देर बाद हमारी लंच की बेल बजी और हम सब अपना-अपना लंच करने के लिए चले गए। टीचर भी वहां से जा चुकी थी। एक लड़के ने मुझसे आकर कहा की तुमने जो अभी टीचर को बताया की तुम बड़े होकर एक बड़े आदमी बनोगे और तुम्हारे आगे पीछे बहुत नौकर होंगे। लेकिन यह सब संभव नहीं है। तुम एक गरीब घर से हो और तुम्हें इतने बड़े-बड़े सपने देखना नहीं चाहिए।

उसकी बात से मुझे बहुत बुरा लगा और मैंने उस समय सोच ली थी कि मैं बड़े होकर कुछ ना कुछ करके दिखाऊंगा और अपने पिताजी को वहां नौकरी नहीं करने दूंगा। जब मैं घर गया तो मेरे पिताजी ने मुझे वहां चलने के लिए कहा। लेकिन मैंने अपने पिताजी को साफ इनकार कर दिया। मैंने कहा मैं आज आपके साथ नहीं जाऊंगा। मैंने अपने पिताजी को भी वहां जाने से मना किया। लेकिन मेरी मां ने कहा कि अगर पिताजी वहां नहीं जाएंगे तो घर में पैसे कहां से आएंगे। मेरे पिताजी चले गए थे अभी मैं बहुत छोटा था तो वह मेरी बातों को समझ नहीं पाए और वह मालिक के घर काम पर चले गए।

ऐसे ही दिनचर्या चलती रही अब मैं थोड़ा बड़ा हो गया। मुझ में थोड़ी समझ आ चुकी थी। मेरी उम्र भी अब 20 साल की हो गई थी तो मैंने फैसला किया अब मैं कहीं बाहर काम पर जाता हूं। मैंने सिर्फ अपना छोटा सा शहर ही देखा था। मुझे लेकिन अपने पिताजी की को एक अच्छी जिंदगी देनी थी इसलिए मैं वहां से अहमदाबाद के लिए निकल पड़ा। मैंने सुबह की ट्रेन पकड़ी और मैं अहमदाबाद पहुंच गया मेरे पास ना तो ज्यादा पैसे थे और ना ही मुझे कुछ पता था।

कुछ दिनों तक तो मैं ऐसे ही फुटपाथ पर सोता रहा। उसके बाद मुझे एक कपड़े की दुकान पर नौकरी मिल गई वो काफी बड़ी दुकान थी और वहां बहुत ही बड़े-बड़े लोग आया करते थे। अभी मैं सिर्फ वहां काम ही सीख रहा था तो मैं ज्यादा किसी से बात नहीं करता था। वह लोग मुझे बहुत अच्छे से काम सिखाते थे और खाना भी देते थे। मुझे रहने के लिए भी एक छोटा सा कमरा दिया था मुझे वहां पर काम करते हुए एक साल से ऊपर हो चुका था। अब मैं काफी सारी चीजे जान चुका था कि कपड़े का कारोबार कैसे किया जाता है और कहां से कपड़े खरीद कर सस्ते दामों पर लाए जाते हैं। मुझे यह समस्या थी कि मेरे पास पैसे नहीं थे। हमारी दुकान पर एक गुजराती आंटी आया करती थी वह  बहुत ही सुंदर और सेक्सी थी। मैं उसे हमेशा देखता रहता था। उसकी चूतडे बहुत बड़ी बड़ी थी और उसका फिगर बहुत ज्यादा टाइट था। अब मैंने उसे थोड़ी नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी और जब भी वह हमारी दुकान पर आती तो मैं उसकी बहुत ही चापलूसी किया करता था।

एक दिन उस आंटी ने मुझे कहा कि आज बहुत सारे कपड़े हो गए हैं तो मैं नहीं ले जा सकती। तुम एक काम करना तुम मेरे घर पर कपड़े छुड़वा देना। मैंने उन्हें कहा ठीक है आप मुझे अपना एड्रेस दे दीजिए मैं आपके घर पर जो कपड़े रख दूंगा। अब मैं उन आंटी के घर पर वह कपड़े लेकर पहुंच गया।

मैंने जैसे ही बेल बजाई तो उन्होंने अपना दरवाजा खोला और मैंने देखा कि आंटी ने एक टाइट नाइटी पहनी हुई है। उसमें उनका पूरा अंदर का फ्रेम दिखाई दे रहा था। जिसे देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और वह बाहर दिखाई दे रहा था। उस आंटी ने मेरे लंड देख लिया और मुझे अंदर बुलाने लगी। मैं जैसे ही अंदर गया तो मैंने देखा घर पर कोई भी नहीं है। उस आंटी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और वह मेरे सामने एकदम नग्नावस्था में खड़ी थी।  मुझे कहने लगी लड़के आ जा और मेरी चूत की प्यास को बुझा दे। मैंने जैसे ही उसकी चूत देखी तो वह बहुत बड़ी थी। उसके स्तन तो कुछ ज्यादा ही बड़े थे और उसकी गांड बहुत ही ज्यादा उभरी हुई थी। मुझे यह देखकर कंट्रोल ही नहीं हुआ और मैंने भी अपने कपड़े उतारते हुए अंटी से चिपक गया।

आंटी ने मेरे मुंह को पकड़ते हुए सीधा अपने दोनों पैरों के बीच में अपनी योनि में लगा दिया और मेरे बालों को कसकर पकड़ लिया और कहती कि अच्छे से  मेरी चूत चाट मैंने बहुत ही अच्छे से उसकी चूत को चाटा। उसने मेरे बालो को पकड़ते हुए अपने बड़े बड़े स्तनों पर मेरे मुंह को लगा दिया। मैंने उसके स्तनों को भी बहुत अच्छे से चूसा और उसका दूध भी पी लिया। मेरा शरीर बहुत ज्यादा गर्म हो गया था और आंटी का शरीर भी गर्म हो चुका था। आंटी ने कुछ देर तक तो मेरे लंड को चूसा मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसती जाती। मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था और मैंने उनकी दोनों टांगो को कसकर पकड़ लिया और अपने कंधे पर रख लिया। मैंने उनके चूत के छेद में अपना लंड घुसेड़ दिया। जैसी ही मेरा लंड उनके अंदर घुसा तो वह कहने लगी तेरा तो बहुत ही मोटा है। मेरे पति का तो बहुत छोटा सा है और मजा भी नहीं आता है। मैंने कहा आंटी आप चिंता ना करें मैं आपकी चूत रगड़ कर रख दूंगा। मैंने अब अपनी स्पीड को पकड़ लिया मैं बहुत तेज तेज झटके देते जा रहा था। उसका पूरा बदन हिलता जाता और उनके स्तन बड़ी तेजी से हिल रहे थे। मैं उसकी चूत की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर सका और मेरा वीर्य पतन हो गया लेकिन मैंने उनकी प्यास को बुझा दिया था।

अब उन्होंने मुझे कुछ पैसे दिए और कहने लगी हर शनिवार को तुम मेरे घर पर आ जाना। जब भी मैं शनिवार को जाता तो उसकी कुछ दोस्त भी आ जाती और मैं उनके साथ भी संभोग करता। उसने मुझे बहुत पैसे दिए जिससे कि मैंने अपनी दुकान खोल ली और वह बहुत अच्छी भी चल रही है। मैं उस अंटी की भी प्यास बुझाता हूं। अब मैंने अपने पिताजी को अपने साथ ही बुला लिया है और वह अब मालिक की तरह कुर्सी पर बैठे रहते हैं और आर्डर देते रहते हैं।