पड़ोस की शांति की सील तोड़ी

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मेरा नाम रमेश है और मैं 25 वर्ष का युवा हूं। मैं अपने माता पिता के साथ बरेली में रहता हूं लेकिन मुझे बरेली में कोई अच्छा काम नहीं मिल पा रहा था इस वजह से मैंने एक छोटी सी दुकान में नौकरी कर ली और जब मैंने उस दुकान में नौकरी की तो मुझे वहां पर काम करना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे मैं सिर्फ अपना समय काट रहा हूं। मैंने एक दिन अपने भाई को फोन कर दिया जो कि बेंगलुरु में रहता है। मुझे भी अब उसके पास ही जाना था क्योंकि बरेली में कुछ भी ऐसा काम नहीं है जिसे मैं करू, इसलिए मैंने अपने भाई गौतम से बात कर लिया और उसने कहा कि तुम मेरे पास ही आ जाओ। कुछ दिन बाद मैं उसके पास ही चला गया। जब मैं गौतम के पास गया तो उसने मेरे लिए एक अच्छी नौकरी देख ली और मैं वही पर नौकरी करने लगा था। मुझे अब बेंगलुरु में नौकरी करते हुए काफी समय हो चुका था और मुझे बेंगलुरु के बारे में सब कुछ पता चलने लगा।

मैं अपनी नौकरी से जब मैं वापस लौटता तो उसके बाद सीधा ही मैं घर पर चला जाता। हमारे ऑफिस में मेरे कुछ दोस्त भी बनने लगे थे जिससे कि मैं उनके साथ ही ऑफिस से घर लौटा करता हूं और हम लोग कभी कभार पार्टी भी कर लिया करते थे। मुझे जब भी समय मिलता तो मैं अपने घर पर फोन कर देता हूं और मेरे माता-पिता बहुत ही खुश होते हैं, वो मुझसे मेरा हालचाल पूछते और कहते कि तुम वहां पर अच्छे से तो हो। मैं कहता  कि हां मैं बहुत ही अच्छे से यहां पर रह रहा हूं। मुझे किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नही है। मैंने एक बार अपने माता पिता को बेंगलुरु भी बुला लिया और वह लोग मुझसे मिलने के लिए बेंगलुरु आ गए। वह मुझसे और मेरे भाई से मिलकर बहुत ही खुश हुए और जब उन्होंने हमें देखा कि हम दोनों बहुत ही अच्छे से रह रहे हैं तो उन्हें भी काफी अच्छा लगा और वो कहने लगे कि हमें बहुत ही खुशी है कि तुम लोग अच्छे से यहां पर रह रहे हो। उसी दौरान मेरी मुलाकात एक पड़ोस में रहने वाली लड़की से हो गई। उसका नाम शांति है और वह कॉलेज में पढ़ाई करती है।

मैं जब भी अपने ऑफिस के लिए जाता तो वह मुझे हमेशा ही दिख जाती थी और जब वह मुझे देखती तो वह मुझे देख कर मुस्कुराती थी। कुछ समय बाद अब हम दोनों के बीच में बातें होने लगी थी और मैंने उससे उसका नंबर भी ले लिया, जिससे कि मैं उसके फोन पर ही बात कर लिया करता था। शांति भी मुझसे बात कर के बहुत खुश होती थी और मैं उससे फोन पर बहुत देर तक बातें किया करता। मुझे बहुत ही अच्छा लगता जब मैं उससे फोन पर बातें किया करता था। जिस दिन शांति की छुट्टी होती है उस दिन हम दोनों कहीं घूमने के लिए निकल जाते और मैं उसे कई बार मूवी दिखाने के लिए भी ले जाता था। मुझे बहुत ही अच्छा लगता जब हम दोनों साथ में मूवी देखा करते थे। मुझे ऐसा लगता की मैं उसके साथ ही समय बिताता रहूं। उसे भी मेरे साथ समय बिताना बहुत अच्छा लगता था और वह हमेशा ही कहती थी कि मुझे तुम्हारे साथ समय बिताना बहुत अच्छा लगता है। अब हम दोनों के बीच काफी नजदीकिया हो गई है और यह बात मेरे भाई को भी पता चल गई। जब यह बात मेरे भाई को पता चली तो वह मुझसे पूछने लगा कि तुम दोनों कब से बात कर रहे हो, तो मैंने उसे सब कुछ बता दिया और उसे कहा कि मैंने ही शांति से पहले बात करना शुरू किया और उसके बाद मैंने उसका फोन नंबर ले लिया था जिससे कि हम दोनों के बीच बातें होने लगी। मैंने एक दिन अपने भाई को शांति से भी मिला दिया, जब मैंने उसे शांति से मिलाया तो वह शांति से मिलकर बहुत ही खुश हुआ। अब शांति हमारे घर भी आ जाया करती थी और वह हम दोनों भाइयों के लिए खाना भी बना देती जिससे कि हम दोनों ऑफिस से आने के बाद खाना खा लिया करते थे लेकिन यह बात उसके घर में बिल्कुल भी नहीं पता थी और वह चुपके से हमारे घर पर आया करती थी। मैंने उसे कई बार समझाया कि तुम ऐसे चुपके से मत आया करो यदि किसी ने तुम्हें देख लिया तो वह हमारे बारे में गलत सोचेगा और गौतम ने भी उसे कई बार समझाया लेकिन वो कहती कि मुझे तुम्हारे लिए खाना बनाना बहुत अच्छा लगता है इसीलिए मैं तुम्हारे यहां पर आ जाती हूं।

मेरी शांति से फोन पर बहुत देर तक बातें हुआ करती थी और कई बार ऐसा होता था कि मैं फोन पर बातें करते करते ही सो जाता था और वो भी कई बार फोन पर बातें करते करते सो जाया करती थी। कभी कबार हम तीनो लोग ही साथ में घूमने चले जाया करते थे क्योंकि गौतम अपने काम में ज्यादा ही बिजी रहता था इसलिए उसे ज्यादा वक्त नहीं मिल पाता था लेकिन हम लोग साथ में ही कई बार घूमने चले जाते थे और जब हमें शॉपिंग करनी होती तो शांति हमें बहुत ही मदद करती थी क्योंकि हम लोगों को पता नहीं होता था कि हमें किस प्रकार के कपड़े लेने हैं इसलिए शांति ही हमें बताया करती थी। हम दोनों अपने ऑफिस में ही बिजी रहते थे इसलिए हमें फैशन का भी पता नहीं होता था और शांति हमारी इस चीज में बहुत मदद किया करती थी। मेरी एक दिन ऑफिस की छुट्टी थी और मैं घर पर ही था उस दिन मै आराम कर रहा था मेरा भाई गौतम कहने लगा कि मैं कहीं काम से बाहर जा रहा हूं मैं शाम तक की लौटूंगा। अब वह चला गया उसी दौरान शांति भी हमारे घर पर आ गई जब वह घर पर आई तो उसने एक छोटी सी स्कर्ट पहनी हुई थी जिसमें कि उसकी गांड के ऊभार साफ दिखाई दे रहे थे और उसके स्तन भी मुझे साफ-साफ नजर आ रहे थे।

मुझे बहुत ही खुशी हो रही थी जब वह मेरे पास आकर बैठ गई मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके स्तनों को दबाना शुरू किया। मैंने उसके स्तनों को इतनी तेजी से दबाया की उसकी योनि से पानी बाहर आ गया मैंने उसकी स्कर्ट को ऊपर करते हुए उसकी पैंटी के अंदर से उसकी चूत में उंगली डाल दी। मैंने देखा कि उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर आ रहा है मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके हाथों में दे दिया वह मेरे लंड को हिलाने लगी और हिलाते हिलाते उसने अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को समा लिया। उसने काफी देर तक मेरे लंड को चूसा जिससे कि मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने उसे अपने नीचे लेटा दिया उसके बाद मैंने उसकी पैंटी उतारते हुए उसकी योनि में मैंने अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि में गया तो उसकी चूत से खून की पिचकारी मेरी तरफ गिर गई। अब मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के देने लगा मैं उसे इतनी तेजी से धक्के मार रहा था की उसकी आवाज निकल जाती। मुझे बहुत मजा आता जब मैं उसे झटके मारता वह भी मेरा साथ दे रही थी। वह मुझे कहने लगी कि मुझे तुमसे अपनी चूत मरवाने मे बहुत ही मजा आ रहा है क्योंकि उसका यह पहला ही अनुभव था इस वजह से उसे बहुत अच्छा लग रहा था। जब मैं उसे धक्के मार रहा था मैंने उसकी चूत से अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसे अपने ऊपर बैठा दिया। उसने मेरे लंड को अपने अंदर ले लिया वह अपनी चूतड़ों को बड़ी तेजी से हिलाने लगी मुझे बहुत अच्छा लगता जब वह अपनी चूतड़ों को हिला रही थी। वह अपनी चूतडो को ऊपर नीचे कर रही थी उसे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब वह इस प्रकार से अपनी चूतडो को करती जाती। मुझसे भी बिल्कुल नहीं रहा जा रहा था और मैं भी उसे धक्के देने पर लगा हुआ था मेरा लंड बुरी तरीके से छिल चुका था क्योंकि उसकी योनि बहुत ही ज्यादा टाइट थी। उसकी चूत से भी खून निकल रहा था और उसका पानी भी बहुत तेजी से निकलने लगा। मैंने उसे भी उतनी ही तेजी से झटके मारने जारी रखें जितने तेज वह अपनी चूतडो को हिलाती। उसने अब इतनी तेज से अपनी चूतडो को हिलाना शुरू कर दिया कि मेरे लंड मे दर्द होना शुरू हो गया और मेरा लंड बुरी तरीके से छिल चुका था लेकिन मुझे इतना आनंद आ रहा था। जैसे ही मेरा माल उसकी योनि के अंदर गिरा तो मुझे बड़ा मजा आया मैंने अब उसकी योनि से अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसे कसकर पकड़ लिया वह मेरे साथ लेटी रही शाम को मेरा भाई भी आ गया था।