हम दोनों ने एक दूसरे की गांड के घोडे खोल दिए

desi porn stories, hindi sex kahani

मेरा नाम शैलेश है और मैं 18 वर्ष का एक स्कूली छात्र हूं। मेरे पिताजी एक प्राइवेट संस्थान में नौकरी करते हैं और वह बहुत ही अच्छे पद पर है। इसलिए उन्होंने मुझे शहर के सबसे बड़े स्कूल में दाखिला करवाया। मैं पढ़ने में भी अच्छा हूं और स्पोर्ट्स में भी बहुत ही अच्छा हूं  इसलिए जब भी हमारे स्कूल से कहीं बाहर प्रतियोगिता के लिए जाना होता या फिर हमारे स्कूल में कभी भी प्रतियोगिता होती तो टीचर मेरा नाम सबसे आगे रखते थे। हमारे स्कूल में बहुत से लड़के हैं उनमें से मेरा एक बहुत ही अच्छा दोस्त है। जिसका नाम राजवीर है। वह भी मेरी तरह ही पढ़ने में भी अच्छा है और स्पोर्ट्स में भी बहुत ही अच्छा है। वह मेरे घर से कुछ दूरी पर ही रहता है और हम लोग स्कूल भी साथ आया करते हैं। मेरा उसके घर पर आना जाना लगा रहता है जिस वजह से उसके घर वाले भी मुझसे बहुत अच्छे से परिचित हैं और वह भी मेरे घर पर आता रहता है। मेरे घरवाले उसे बहुत अच्छा मानते हैं क्योंकि वह बहुत ही अच्छा लड़का है और उसके पिताजी हमारे स्कूल में टीचर भी हैं  हम दोनों की बहुत ही अच्छी दोस्ती है और हम दोनों साथ में ही रहते हैं। हमें अभी कहीं पर भी जाना होता तो हम दोनों साथ ही जाते थे। सब लोग हमें भाई समझते थे। हम लोग बहुत सारी मस्तियां क्या करते थे। अपना इंजॉय भी करते थे। हम दोनों को फुटबॉल का बहुत ही शौक है हम दोनों फुटबॉल बहुत ही अच्छा खेलते हैं इसलिए हम लोग उसकी प्रैक्टिस के लिए भी कोचिंग क्लासेज जाते थे।

वहां पर हमारे टीचर हम दोनों को कहते थे कि तुम दोनों बहुत ही अच्छा फुटबॉल खेलते हो। अब यदि तुम अच्छे से प्रेक्टिस करोगे तो तुम कुछ अच्छा कर सकते हो  इसलिए हम दोनों वहां पर हमेशा ही जाते थे और कभी भी हम अपने स्पोर्ट्स की क्लास को मिस नहीं करते और हमेशा ही प्रेक्टिस के लिए जाते थे। एक बार हमारे स्कूल की टीम किसी अन्य स्कूल में प्रतियोगिता के लिए जाने वाली थी। उसमें राजवीर और मेरा नाम भी था। हम दोनों बहुत ही प्रेक्टिस कर रहे थे और हम चाहते थे कि हमारे स्कूल की टीम ही विजेता बने इसलिए हम दोनों बहुत ही प्रेक्टिस कर रहे थे और हमारे साथ कि हमारी टीम भी बहुत अच्छी थी। वह सब भी खेलने में बहुत बढ़िया थे। इसलिए जो हमारे स्पोर्ट्स के टीचर थे वह हम पर बहुत ही ध्यान दे रहे थे और हम लोग बहुत ज्यादा प्रेक्टिस किया करते थे। इसलिए हमें कभी कबार घर जाने में भी लेट हो जाती थी और हम बहुत ही थक जाते थे। हम लोग घर जाते ही सो जाते थे। जब हमें प्रतियोगिता के लिए जाना था तो उससे एक दिन पहले हमारे स्कूल में हमारे टीम की मीटिंग हुई और हमारे बीच में डिस्कस हुआ कि वहां पर हमें किस तरीके से खेलना है और कैसे हम लोग अपना गेम प्लानिंग रखेंगे। हमारे स्पोर्ट्स टीचर ने हमें साफ कह दिया था कि वहां पर कोई भी लड़का किसी भी लड़के के साथ झगड़ा नहीं करेगा। इस वजह से वह हमें समझाने में लगे हुए थे कि यह बात तुम अपने कान में बिल्कुल डाल लेना कि वहां पर कोई भी किसी लड़के के साथ बिल्कुल भी झगड़ा नहीं करेगा। क्योंकि पिछले वर्ष जब हमारी टीम गई थी तो हमारे साथ के ही एक लड़के ने दूसरे लड़के के साथ बहुत मार पिटाई की थी जिसकी वजह से हमारे स्कूल की बहुत ज्यादा बदनामी हुई थी। हमारे सर इस समय बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि हम वहां पर किसी भी तरीके से कोई झगड़ा करें। इसलिए उन्होंने हमे हिदायत दे दी थी। हम लोग जब दूसरे स्कूल में गए तो वहां का ग्राउंड बहुत ही बड़ा था और हम लोग बहुत खुश थे कि अब हम इसमें खेलने वाले हैं।

हमारे टीचर हमें कह रहे थे कि तुम अच्छे से खेलना। जिस दिन हमारा मैच था उस दिन हम लोगों ने उससे पहले बहुत प्रेक्टिस किया। इतनी प्रेक्टिस करने के बाद हम लोग मैच जीत चुके थे। दूसरी टीम ने भी बहुत अच्छा खेला लेकिन मैच हमारे ही पक्ष में गया और हम सब बहुत खुश हैं। हमारे टीचर भी इस बात से बहुत ज्यादा खुश है कि हम लोग प्रतियोगिता का पहला मैच जीत चुके हैं। अब जब शाम को हम लोग मिले तो उन्होंने हमें बहुत बधाइयां दी और कहा कि तुम लोगों ने बहुत ही अच्छे से खेला है और इसी तरीके से तुम खेलते रहोगे तो फाइनल जरूर जीत जाओगे। अब वह अपने रूम में चले गए और हमारे साथ के जितने भी लड़के थे वह सब अपने रूम में चले गए। राजवीर और मैं एक ही रूम में रुके हुए थे। इसलिए हम दोनों आपस में बहुत डिस्कशन कर रहे थे कि हम लोगों ने मैच में क्या गलतियां की है और हमें आगे वह नहीं दौरानी है। राजवीर भी मुझे समझा रहा था कि तुम थोड़ा और अच्छा खेल सकते हो। अब तुम अपने खेल को थोड़ा और इंप्रूव करो। मैं भी उसे कुछ सुझाव दे रहा था और हम दोनों बहुत ही खुश थे। हम दोनों काफी देर तक बात कर रहे थे।

राजवीर मुझे कहने लगा कि हम लोग ब्लू फिल्म देखते हैं वैसे भी हम दोनों इस कमरे में अकेले हैं और सब लोग दूसरे कमरे में थे। मैंने उसे कहा कि ठीक है तुम अपने मोबाइल पर मुझे ब्लू फिल्म दिखा दो, क्योंकि वह बहुत ही शौकीन था इन सब चीजों का। जब हम ब्लू फिल्म देख रहे थे तो उसमें गे सेक्स देख रहे थे। पहले हमें अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन बाद में हमें बहुत अच्छा लगने लगा। अब राजवीर ने मेरे जांघों को पकड़ लिया और कहने लगा कि आज हम दोनों ट्राई करते हैं। मैंने उसे कहा तुम्हारा दिमाग सही है यह सब गलत है। उसने मुझे कहा कि एक बार तुम ट्राई तो करके देखो। मैं उसकी बातों को मान गया और मैंने उसके लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया। जब मैंने उसके लंड को मुंह में लिया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा। उसके लंड पर एक भी बाल नहीं था और मैं उसे बहुत ही अच्छे से चूस रहा था। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसके लंड को चूसता जाता। उसने मेरे चूतड़ों को पकड़ते हुए मेरी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही उसका लंड मेरी गांड में गया तो मैं चिल्लाने लगा। मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था लेकिन मैं सोच रहा था कि मैं भी तो राजवीर की गांड मारूंगा इसलिए मैं बहुत खुश हो रहा था और मैं अपनी गांड को उसकी तरफ करता जाता। वह मुझे बड़ी तेज तेज धक्का मार रहा था मेरे गले से आवाज निकाल रही थी और वह मुझे पूछने लगा तुम्हें मजा तो आ रहा है। मैंने उसे कहा कि मुझे बहुत ही मजा आ रहा है तुम ऐसे ही मेरी गांड मारते रहो। वह बड़ी तेजी से मुझे धक्के मार रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे कहीं चक्कर ना आ जाए लेकिन मुझे भी मजा आ रहा था और मैंने भी अपनी गांड को उसके लंड से टकराना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद उसके लंड से उसका वीर्य निकल गया और उसने वह सब मेरी गांड के अंदर ही डाल दिया। मैंने राजवीर से कहा कि मुझे बहुत मजा आया जब तुम मेरी गांड मार रहे थे। वह भी मुझे कहने लगा कि मुझे बहुत मजा आया।

अब मैंने राजवीर को कहा कि मैं तुम्हारी गांड मारता हूं। उसने अपनी गांड को मेरे सामने कर दिया और उसकी गांड बहुत ज्यादा गोरी थी। मैंने तुरंत उसके गांड के अंदर अपना लंड  डाल दिया और जब मैंने अपने लंड को डाला तो उसकी गांड से खून भी आने लगा। वह चिल्ला रहा था लेकिन मैं उसे ऐसे ही धक्के दिए जा रहा था। मैंने उसकी गांड को बड़ी तीव्र गति से झटके देना शुरु कर दिया। जिससे कि उसके गले से आवाज निकलने लगी और वह कहने लगा तुम्हारा लंड तो मुझसे भी ज्यादा मोटा है। मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है लेकिन मुझे मजा भी आ रहा है। उसकी गांड से खून निकल रहा था लेकिन मैं उसे ऐसे ही धक्के देने पर लगा हुआ था। मैंने उसे बहुत ही स्पीड में धक्के देने शुरू कर दिए जिससे कि उसका शरीर गर्म होने लगा और वो मुझसे अपनी गांड को टकराता जाता। वह इतने अच्छे से मुझसे गांड टकरा रहा था कि मेरे लंड पर दर्द होने लगा और मेरा वीर्य थोड़ी देर बाद उसकी गांड के अंदर जाकर गिर गया। मुझे भी बहुत मजा आया और वह भी बहुत खुश था। उसके बाद हम दोनों ने ना जाने कितनी बार एक दूसरे की गांड मारी है, लेकिन अब हम दोनों को एक दूसरे की आदत हो चुकी है। हमें किसी भी लड़की की आवश्यकता नहीं पड़ती।