गे स्टोरी सुनील की

Gay sex stories, antarvasna

बनारस में एक सुनील नाम का युवक रहता था। अपने बचपन में वह बहुत होशियार था। बहुत से लोग उसकी तारीफ करते थे। लेकिन उसके साथ समस्या यह थी कि उसे भीड़ से बहुत डर लगता था। डर का कारण उसको बचपन में हुए यौन शोषण का है जो रिश्तेदार के द्वारा हुआ था। रिश्तेदार और कोई नहीं उसका सगा ताऊ था। उसके अदाओं ने उसकी बचपन में ही तेल लगा कर उसकी गांड  मार दी। तब से उसके अंदर अपने ताऊ का खौफ था। क्योंकि इसके ताऊ के बच्चे थे नहीं और उसकी पत्नी भी उससे अलग रहती थी। इस वजह से सुनील आप नेताओं के साथ सोता था। ताऊ के अंदर भी मर्दानगी थी तो उसने सब सुनील की गांड मे अपने लंड के माध्यम से उतार दिया था। और ना जाने कितनी बार ही किया था। जब वह बड़ा हुआ तो उसका डर इतना बढ़ गया कि वह घर से बाहर निकलने से भी डरता था। वह कहीं बाहर बहुत कम ही जाता था। लेकिन उसे पढ़ने लिए अपने कॉलेज तो जाना ही होता था। कॉलेज जाते और आते समय भीड़ देखकर उसका मन परेशान हो जाता था। इस कारण न तो उसका पढ़ाई में मन लगता था। और न ही किसी और काम में मन लगता था। वह सोचता था कि अपनी इस डर की समस्या के कारण वह अपनी जिंदगी में कभी सफल नहीं हो पाएगा। इस कारण उसका गुस्सा भी बढ़ गया था।

एक दिन उसके शहर में एक बहुत बड़े और प्रसिद्ध डॉक्टर आए। वह डॉक्टर सभी लोगों की समस्याओं का समाधान करते थे। जिससे बहुत से लोगों को लाभ हुआ था। सुनील ने सोचा कि शायद वह मेरी समस्या का भी कोई समाधान कर दें ।दूसरे ही दिन सुनील डॉक्टर से मिलने पहुंच गया। और उसने अपनी पूरी समस्या उस  डॉक्टर को बता दी। डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम्हारी समस्या का हल मेरे पास है। लेकिन यदि तुम्हे मुझ पर विश्वास हो तो मैं वह समाधान तुम्हें बता सकता हूँ।”सुनील ने कहा, “आप पर विश्वास करके ही मैं यहाँ आया हूँ, कृपया समाधान बताएं।”तभी  डॉक्टर ने एक बहुत छोटा यंत्र डिलडो सुनील को देते हुए कहा, “यह एक यंत्र है। इसकी खासियत यह है कि यह जिसके पास होता है। उसे कभी भी डर नहीं लगता और यह हर समस्या में सहायता भी करता है। डॉक्टर ने कुछ दवाइयां सुनील को दी। डॉक्टर सुनील को अपने क्लीनिक के कमरे में  ले गया। डॉक्टर सुनील को बोलने लगाओ मुझे पूरी बात बताओ क्या क्या हुआ था। सुनील अपने बचपन की पूरी बातें डॉक्टर से बताइए और कहने लगा डॉक्टर साहब मेरे  ताऊ ने मेरे साथ बचपन में मेरी गंड कैसे मारी।

डॉक्टर ने सुनील को कहा एक एक बात बताओ शुरू से लेकर आखिरी तक उसने बोला एक रात मेरे ताऊजी दारू पीकर आऐ और मैं बचपन में ताऊ जी के साथ ही सोता था। क्योंकि वह मुझे बहुत प्यार करते थे और मुझे नहलाते भी थे। इसी वजह से मैं उनके साथ बहुत ज्यादा रहता था। उस रात में और मेरे ताऊजी सोए हुए थे।  मेरे ताऊजी ने मुझसे अपना बड़ा सा लंड सट्टा रखा था। मैं तो बहुत गहरी नींद में था किंतु वह कुछ बेचैन से दिखाई दे रहे थे। तभी अचानक से वह उठे और उन्होंने बगल में रखे लोटे से पानी निकाल कर पिया। शायद दारू पीकर आऊंगा गला सूखा हुआ था। फिर वह मेरे पास आया और मुझे सहलाने लगे। उन्होंने मेरे गांड पर हाथ फेरना शुरु कर दिया। उन्होंने मेरे निक्कर को भी फाड़ दिया और फैक दिया। ना जाने कहां से उन्होंने सर पर लगाने वाला तेल लिया और मेरी नन्ही सी चूतड़ों के बीच में से मेरे सुराख में पेल दिया। मेरे खून की पिचकारियां निकलने लगी मुझे डरा धमका कर किसी को कुछ ना बोलने के लिए कहा। मैं बैठा रहता था। लेकिन मैंने किसी को कुछ बताया नहीं । यह सुनते हुए डॉक्टर ने उसे बोला तुम्हारे डर का कारण यह नहीं है। तुम्हें डर इस चीज का है कि तुम्हें तुम्हारे ताऊ जी के जैसा कोई नहीं मिलेगा। उनके लंड से तुम्हें लगाव था इसी वजह से तुमने किसी को कुछ नहीं बताया। आज मैं तुम्हारा डर पूर्ण रुप से खत्म कर दूंगा।

डॉक्टर ने थोड़ी देर बाद सुनील के बदन पर हाथ फेरना शुरू किया। सुनील डर रहा था। डॉक्टर बोला मुझ पर भरोसा रखो और जैसा मैं करता हूं मेरा साथ दो। सुनील चुपचाप बैठा रहा। बैठे बैठे डॉक्टर ने सुनील को कहा मेरी पैंट की ज़िप खोलो और वहां से मेरे लंड को बाहर निकालो। सुनील ने डॉक्टर की बात मानी और उसकी पेंट खोलकर वहां से डॉक्टर का लंड बाहर निकाला। डॉक्टर ने उसे बोला इसको अपने मुंह में लो। जैसे ही सुनील डॉक्टर के लंड को अपने मुंह में लेने लगा। उसे कुछ अजीब सी खुशबू आने लगी। उसने डॉक्टर से पूछा क्यों खुशबू कैसे आ रही है डॉक्टर ने कहा यही तो है। जिसे तुम भाग रहे हो। डॉक्टर ने कहा यह मेरे लंड की खुशबू है। और सुनील ने डॉक्टर के लोड़े को अपने मुंह में ले लिया। सुनील को कुछ नमकीन सा एहसास हुआ लेकिन वह स्वादिष्ट लगने लगा सुनील को अब तो जैसे सुनील डॉक्टर के लंड की खुशबू में खो गया था। और मजे से अंदर बाहर करने लगा। करीबन 10 मिनट बाद ऐसा करते करते हैं डॉक्टर ने सुनील को कहा अब अपने पेंट को उतार दो सुनील ने कहा कि डॉक्टर उसने अपनी पेंट को भी नीचे कर दिया था। डॉक्टर ने अपना काला और जला सा लंड को थूक लगाकर सुनील के  गांड की छेद में प्रवेश करवा दिया था। सुनील को ऐसा लगा जैसे उसके ताऊ जी डॉक्टर के रूप में आ गए हैं। डॉक्टर ने अब अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था जिससे सुनील के गांड के गूदे में रगड़न पैदा होने लगी थी। सुनील को भी अच्छा एहसास होने लगा था। 45 मिनट तक संभोग प्रक्रिया करने के बाद डॉक्टर ने सुनील की गांड में अपना वीर्य डाल दिया। वीर्य डलने के साथ ही सुनील का डर भी समाप्त हो गया। सुनील बहुत खुश हुआ और अपने घर लौट आया।

अगले दिन जब वह कॉलेज के लिए जाने लगा तो उसने उस यंत्र को अपने पास रख लिया। घर से बाहर निकलते ही उसका सामना भीड़ से हुआ। पहले तो उसे कुछ डर लगा लेकिन उस डिलडो का ध्यान आते ही उसका डर भाग गया। उस दिन  सुनील को भीड़ से बिलकुल भी डर नहीं लगा। वह बहुत खुश था। अब उसे लगने लगा था कि डिलडो काम कर रहा है। भीड़ से अब डर न लगने के कारण वह अब आराम से कहीं भी बाहर जा सकता था। उसे अब गुस्सा भी नहीं आता था। जब भी वह घर में अकेला होता वह डिलडो से अपनी गांड की खुजली मिटाता। अब वह सफल होने के बारे में सोचने लगा था। अब उसे यह विश्वास हो गया था कि वह जीवन में कोई भी सफलता प्राप्त कर सकता है सुनील का जीवन बदल चुका था। कुछ ही समय बाद वह सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ता चला गया। और एक सफल इंसान के रूप में गिना जाने लगा। अब सुनील को उन डॉक्टर की याद आयी तो उनसे मिलने पहुंच गया। सुनील ने डॉक्टर को अपनी सफलता के बारे में बताया और उस डिलडो की तारीफ करने लगा।

तभी वह डॉक्टर बोले, “वह डिलडो जो मैंने तुम्हें दिया था वह तो मुझे मेरे दोस्त ने मेरे जन्मदिन पर दिया था। मुझे वह डिलडो  अच्छा लगा  और मैं भी उसे  अपनी  गांड में  इस्तेमाल करने लगा  क्योंकि  मैं भी तुम्हारी तरह  पहले बहुत डरता था  आज एक सफल व्यक्ति हूं। कुछ समय रुकने के बाद डॉक्टर फिर बोले, “ क्या तुमने भी इसको अपनी गांड में लिया था। यह सुनकर सुनील को बहुत आश्चर्य हुआ।सुनील बोला, “जब यह एक डिलडो है। तो इसने मेरा डर कैसे दूर कर दिया? और आज मैं जिस सफलता के शिखर पर हूँ तो वहां मैं कैसे पहुंचा?”तब वह डॉक्टर मुस्कुराते हुए बोले, “सच है कि इस डिलडो ने तुम्हें कोई लाभ नहीं पहुँचाया बल्कि तुम्हारी विश्वास की शक्ति ने तुम्हारे डर को भगाया और विश्वास की शक्ति ने ही तुम्हे सफल बनाया है।तुम अपने डर पर विजय प्राप्त इसीलिए नहीं कर पा रहे थे क्योकि तुम्हें खुद पर विश्वास नहीं था। लेकिन जब मैंने तुम्हें यह डिलडो दिया तो इसकी वजह से तुम्हारे अंदर विश्वास पैदा हो गया। तुम्हारे विश्वास के कारण ही डर भाग गया और डर के जाते ही तुम्हारा आत्मविश्वास और ज्यादा बढ़ गया। जैसे-जैसे तुम सफल होते गए वैसे-वैसे तुम्हारा खुद के लिए विश्वास बढ़ता गया और इसी विश्वास की वजह से आज तुम एक सफल व्यक्ति बन पाए हो।”

यह बात खत्म होते ही डॉक्टर ने सुनील की गांड में अपना काला भुरभुरा लोड़ा तेल लगाते हुए घुसेड़ दिया। और थोड़ी देर बाद डॉक्टर ने अपना वीर्य सुनील की लाल गांड में घुसा दिया। फिर डॉक्टर ने अपना लंड बाहर निकालते हुए कहां  अब तुम इस डिल्डो को मेरे सामने अपनी गांड उतारो सुनील ने वैसा ही किया। यह देखकर डॉक्टर अति प्रसन्न हुआ।